राजद सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को को पत्र लिखकर कृषि ट्रांसफार्मरों को समय पर न बदलने और बिजली आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है।
बक्सर। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पत्र लिखकर कृषि ट्रांसफार्मरों को समय पर न बदलने और बिजली आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है। सुधाकर सिंह ने कहा कि बक्सर में विद्युत विभाग की कार्य प्रणाली किसानों के लिए गंभीर संकट का कारण बन चुकी है। इस समय धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई का सबसे महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। ऐसे समय में यदि कृषि विद्युत ट्रांसफार्मर जल जाता है अथवा खराब हो जाता है, तो उसे बदलने में कई स्थानों पर 20–30 दिन तक का समय लग रहा है। परिणामस्वरूप किसानों की सिंचाई एवं बुआई बाधित हो रही है, फसलें सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब है जब बिहार विद्युत वितरण कंपनियों के स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के अनुसार शहरी क्षेत्रों में खराब वितरण ट्रांसफार्मर को 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे के भीतर बदलना निर्धारित है। इसके बावजूद बक्सर में इन मानकों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और किसानों को समय पर राहत नहीं मिल रही है।
सुधाकर सिंह ने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक विषय बक्सर के ट्रांसफार्मर रिपेयर वर्कशॉप की कार्यप्रणाली है। बक्सर से ट्रांसफार्मरों को पहले आरा भेजा जाता है, फिर वही ट्रांसफार्मर को पुनः बक्सर वापस लाकर लगाया जाता है। आज जब पूरा देश डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के युग में प्रवेश कर चुका है, तब बक्सर में इस प्रकार की अव्यवहारिक और खर्चीली व्यवस्था कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि बक्सर के ट्रांसफार्मर का उपयोग अंततः बक्सर में ही होना है, तो उसे आरा भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ती है। इस प्रक्रिया में परिवहन पर होने वाला अतिरिक्त सरकारी व्यय किसके हित में किया जा रहा है। क्या यह व्यवस्था केवल सरकारी धन की अनावश्यक बर्बादी नहीं है। विभाग के किस प्रशासनिक तंत्र और किस अधिकारी की अनुमति से यह व्यवस्था वर्षों से संचालित हो रही है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग, सार्वजनिक धन की बर्बादी और किसानों के हितों की उपेक्षा का गंभीर विषय है। अतः आपसे आग्रह है कि बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सभी खराब कृषि ट्रांसफार्मरों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर बदलना तत्काल सुनिश्चित कराया जाए।
सुधाकर सिंह ने कहा कि वर्तमान बुआई एवं पटवन को देखते हुए कृषि ट्रांसफार्मरों के लिए विशेष आपातकालीन व्यवस्था लागू की जाए। बक्सर से ट्रांसफार्मर आरा भेजने एवं पुनः वापस लाने की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। किसान केवल बिजली नहीं मांग रहे हैं, वे अपनी मेहनत और अपनी फसल बचाने का अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि बुआई एवं पटवन के समय में भी एक ट्रांसफार्मर बदलने में 1 महीना लग जाए, तो इसका अर्थ है कि व्यवस्था किसानों के साथ नहीं, बल्कि उनकी कठिनाइयों के विरुद्ध खड़ी है। ऐसी स्थिति में सरकार की जवाबदेही केवल नियम बना देने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि नियम का पालन एवं इसका उल्लंघन करने वाले दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार करना भी है। आशा है कि किसानों के हित में इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का कार्य करेंगे।
