कैबिनेट बैठक में सड़क, पुल, सिंचाई, पेयजल और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की स्वीकृति।
दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी चीनी मिल को फिर से शुरू करने का फैसला।
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार 29 जुलाई को कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कुल 24 एजेंडों पर मुहर लगी। कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा दोनों दोनों उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के अलावा सभी मंत्री समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। कैबिनेट बैठक में सड़क, पुल, सिंचाई, पेयजल और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी गई। सम्राट कैबिनेट की बैठक में राज्य में आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका के 22 हजार पदों पर बहाली को मंजूरी दी गई। आंगनवाड़ी में 22 हजार पदों पर होने वाली बहाली से बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़ी दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी चीनी मिल को फिर से शुरू करने का फैसला भी लिया गया है। बंद पड़ी चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने से स्थानीय किसानों और मजदूरों को भी फायदा होगा।
कैबिनेट ने जमुई के एनएच-333ए पर 2 उच्च स्तरीय आरसीसी पुलों के निर्माण को मंजूरी दी। वहीं, खैर-सोनीपत के मांगो बंदर स्थित सुकन्या नदी पर करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई है। सम्राट सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से आवागमन आसान होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। कैबिनेट बैठक में जलापूर्ति और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर भी बड़े फैसले लिए गए। केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 मिशन के अंतर्गत अंतर्गत लखीसराय एवं किशनगंज जलापूर्ति परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। लखीसराय जल परियोजना के लिए 150 करोड़ रुपये और किशनगंज जलापूर्ति परियोजना के लिए 53 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। सम्राट सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से हजारों लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। कैबिनेट ने बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन योजना के तहत वेजफेड की त्रि-स्तरीय सहकारी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिए 106.39 करोड़ रुपये की योजना की स्वीकृत दी। सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। सम्राट सरकार का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, सब्जियों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देना और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन की व्यवस्था विकसित करना है।
