कैबिनेट बैठक में सड़क, सिंचाई, कृषि, भंडारण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने बक्सर से भागलपुर के बीच 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के सैद्धांतिक प्रस्ताव को मंजूरी दी।

पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार 19 अगस्त को बिहार कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कुल 13 एजेंडों पर मुहर लगी। कैबिनेट बैठक में सड़क, सिंचाई, कृषि, भंडारण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। बक्सर से भागलपुर के बीच 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के सैद्धांतिक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह एक्सप्रेसवे अरवल, जहानाबाद, नालंदा और जमुई समेत कई जिलों से होकर गुजरेगा। सड़क पूरी तरह नियंत्रित प्रवेश वाली होगी यानी वाहनों को सिर्फ निर्धारित स्थानों से ही प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी। परियोजना को पीपीपी मॉडल के तहत बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से विकसित किया जाएगा। इसके बनने से बिहार के कई जिलों के बीच सफर तेज और आसान होने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने किसानों के लिए भी अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11 हजार निजी नलकूप लगाए जाएंगे। इसके लिए सम्राट सरकार ने 305.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बेहतर जल सुविधा उपलब्ध कराना है। निजी नलकूपों की संख्या बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा खेती पर निर्भर किसानों को मिल सकता है। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कटिहार में कई नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन को भी मंजूरी दी गई है। सिंचाई प्रमंडल, कटिहार के तहत कटिहार वितरणी, फूलपुर, हसनगंज, बैजनाथपुर और सेमापुर उप-वितरणियों से जुड़ी नहर प्रणालियों के पुनर्स्थापन पर काम होगा। इसके लिए 35.82 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और व्यय स्वीकृति दी गई है। नहरों के बेहतर होने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है। राज्य में एआई से जुड़े अवसर और नई तकनीक विकसित करने के लिए टायो एआई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एमओयू करने को मंजूरी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में एआई, तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा देना है। इससे बिहार को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 48,200 मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके तहत 200, 500 और 1,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जाएंगे। इसके लिए 52 चयनित समितियों को कुल 34.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस राशि का 50 फीसदी हिस्सा अनुदान और 50 फीसदी चक्रीय पूंजी के रूप में दिया जाएगा। नई भंडारण व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। गांव और पंचायत स्तर पर गोदाम उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज तुरंत कम कीमत पर बेचने की मजबूरी कम हो सकती है। सम्राट सरकार की कोशिश है कि स्थानीय स्तर पर भंडारण की सुविधा बढ़े और किसानों की उपज सुरक्षित रहे। इससे सहकारिता समितियों को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।