केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गुजरात मॉडल की तरह बिहार में भी शराबबंदी लागू करने की मांग की।
पटना। बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फिर बड़ी मांग की है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा की युवा इकाई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रविवार को जीतन राम मांझी ने कहा कि नशाबंदी का कानून अपनी जगह ठीक है, लेकिन इसके पालन में कहीं-कहीं पुलिस स्तर पर दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की अपील की और गुजरात मॉडल की तरह बिहार में भी शराबबंदी लागू करने की मांग की। जीतन राम मांझी ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी शराबबंदी लागू है, लेकिन कुछ लोगों को परमिट और तय नियमों के तहत शराब की अनुमति मिलती है। जीतन राम मांझी का तर्क है कि बिहार में भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए यानी कानून के साथ ऐसी व्यवस्था हो जिसमें तय नियमों के तहत सीमित छूट की गुंजाइश हो और अवैध शराब के कारोबार पर भी रोक लग सके।
आपको बता दें कि बिहार में शराबबंदी में बदलाव को लेकर जीतन राम मांझी पहली बार आवाज नहीं उठा रहे हैं। इससे पहले 2022 में भी उन्होंने बिहार में गुजरात के परमिट मॉडल को लागू करने की मांग की थी। 2023 में गुजरात के गिफ्ट सिटी में शराब सेवन को लेकर दी गई सीमित छूट के बाद भी जीतन राम मांझी ने बिहार में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की वकालत की थी। दरअसल, जीतन राम मांझी लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि सख्त शराबबंदी के कारण अवैध शराब का कारोबार बढ़ता है और इसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है। कानून का इस्तेमाल कई बार गरीब और कमजोर लोगों के खिलाफ ज्यादा होता है।
ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शराबबंदी में किसी तरह की छूट देने से इनकार कर चुके हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने साफ कहा था कि बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी और इसे हटाने या इसमें किसी तरह की छूट देने का सवाल ही नहीं है। उन्होंने अवैध और जहरीली शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही थी। बहरहाल, शराबबंदी को लेकर बिहार में अब बहस सिर्फ सामाजिक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानून व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का सवाल भी जुड़ गया है। एक तरफ जीतन राम मांझी गुजरात मॉडल की तर्ज पर बदलाव की मांग कर रहे हैं, तो वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूर्ण शराबबंदी जारी रखने का स्पष्ट संकेत दे चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सम्राट सरकार जीतन राम मांझी की मांग को किस तरह से देखती है।
